Sunday, July 25, 2010

बाढ़ का दृश्य मेरे नजर से .........!!


वन्दे मातरम !!
मै आपका अपना गौरव शर्मा पिछले पोस्ट पर मिले आप सभी के स्नेह और आशीर्वाद के लिए आप समस्त आत्मीय जनों का आभार व्यक्त करते हुए आज अपने शहर रायपुर में विगत दो दिनों के भारी बारिश के बाद निर्मित बाढ़ की तस्वीर जिसके दर्शन मैंने किये उसे आपके समक्छ प्रस्तुत करने के लिए आज पुनः उपस्थित हूँ , {विदित हो की मुझे कविता लिखने बिलकुल भी नहीं आता पर प्रयास निरंतर जारी है } कुछ पंक्ति प्रस्तुत है :


बाढ़ देख रहा था मै बाढ़ देख रहा था ,
झाड़ पर खड़े होकर बाढ़ देख रहा था

उजड़ रहा घरद्वार बिखर रहा परिवार और
कहीं चेहरे पर ख़ुशी तो कहीं आंशुओं के सैलाब देख रहा था

किसानों के माथे चिंता की लकीरें और फसल हो रहा बर्बाद, साथ ही
चारों और फैली सिर्फ गंदगी और लोगों को होते बीमार देख रहा था

झोपड़ों में भरता पानी महलों में मनता रहा त्यौहार और
कहीं निकम्मी सरकार तो कहीं जनता को लाचार देख रहा था

प्रशाशन के दावों को होते तार तार और
राहत के नाम पर चल रहा व्यपार देख रहा था

ऊपर वाले का मासूमों पर होता अत्याचार और
ऐसे हालत में भी लोगों का उसपर पर ऐतबार देख रहा था


बाढ़ देख रहा था मै बाढ़ देख रहा था ,
झाड़ पर खड़े होकर बाढ़ देख रहा था

Wednesday, July 21, 2010


वन्दे मातरम !!
आपको सूचित करते हुए अत्यंत हर्ष हो रहा है की आप समस्त देशभक्तों एवं देश के समर्पित जागरूक नागरिकों के सहयोग से देश की जनता को एकता और "भारतीयता" के सूत्र में पिरोने के उद्देश्य से "अभियान भारतीय" की शुरुआत 15 अगस्त 2010 "स्वतंत्रता दिवस " के पावन अवसर से की जाएगी !!
पुनः आप सभी से अपील, की अब हम जाती, धर्म, भाषा के भेदभाव को त्यागकर एक हो जाएँ और भारत को विश्वगुरु के पुरातन स्वरूप में पुनः प्रतिष्ठित करें.......
मै यहाँ उल्लेख करना चाहता हूँ अपने उन आत्मीय जनों का जिनसे मुझे यह प्रेरणा मिली और जिनके मार्गदर्शन जिनके सहयोग से मै इस विचार को आपके समक्छ प्रस्तुत कर रहा हूँ :- आदरणीय एस. एम्. हबीब साहब, भाई युवराज शर्मा, आदरणीय गोपाला जी, भाई गीतेश जैन, भाई पलाश डोंगरे, भाई सागर तिवारी, भाई अमित दुबे, आदरणीया ममता दीदी, भाई केवल श्रीवास, भाई अभिषेक कसार, भाई नागेश राउत, भाई अमित शर्मा सहित जिनसे भी हमें प्रत्यक्छ अप्रत्याक्छ सहयोग प्राप्त हो रहा है मै उन सभी के प्रति आभार व्यक्त करता हूँ एवं भविष्य में भी सहयोग की कामना करता हूँ ..........वन्दे मातरम !!

Monday, July 12, 2010

""अभियान भारतीय""


वन्दे मातरम !!
मै आज एक महत्वपूर्ण निर्णय से पूर्व आपकी सलाह, आपकी राय जानना चाहता हूँ , हम इंटरनेट के माध्यम से एक अभियान की शुरुआत आप सभी आत्मीय जनों के मार्गदर्शन और आशीर्वाद से करना चाहते हैं जिसका नाम है ""अभियान भारतीय""
हमारा उद्देश्य है की हम देश की आम जनता तक यह सन्देश पहुंचाएं की अब हम हिन्दू मुस्लिम सिख इसाई में न बंटकर सिर्फ "भारतीय" रहें और इसी रूप में अपने भारत को पुनः विश्वगुरु के स्थान पर आसीन करें !!
हम भारत देश को "भारतीयता" का सन्देश देकर एकता के सूत्र में पिरोना चाहते हैं !!
हम सभी ब्लॉग एवं इंटरनेट पर मौजूद अन्य माध्यमों से इस सन्देश को प्रसारित कर सकते हैं निश्चित ही इस उद्देश्य को सुधीजनों का आशीर्वाद और सहयोग मिलेगा और यह अभियान सफल होगा, इसके बाद जब हमारे साथ एक बड़ा तबका मौजूद होगा तो यह प्रयास और हमारा अभियान इंटरनेट से बाहर व्यापक रूप में गली-कुचों चौक-चौराहों में भी प्रसारित होगा और वहां भी लोग इसे सराहेंगे ऐसी आशा ही नहीं वरन विश्वास है!!
हमारे इस विचार और अभियान को आपके सहयोग की अपेक्छा है अतः इस विषय पर आप मुझे अपने महत्वपूर्ण विचार से अवगत अवश्य कराएँ वन्दे मातरम !!

Friday, July 2, 2010

आतंकवादियों के फांसी का विरोध करने वालों का विरोध...


वन्दे मातरम !!
आज हर भारतवासी की तरह मै भी व्यथित हूँ, और यह सोचने पर मजबूर हूँ की कैसे कोई व्यक्ति और विशेषकर वह व्यक्ति जो सर्वाधिक आतंकी गतिविधियों से पीड़ित प्रदेश का मुखिया है, आतंकवादियों की फांसी की सजा को माफ़ करने की बात कर सकता है......आज एक आम भारतीय होने के नाते मै इस विचार का विरोध करता हूँ और मुझे यह कहने में कतई संकोच नहीं है की इस प्रकार की बात करने वाले लोगों पर शासन प्रशासन कोई कार्यवाही करे न करे पर जनता ऐसी भावनाओं और इस गुहार को तो कतई स्वीकार नहीं करेगी !!
मै अपनी भावनाएं इस कविता के माध्यम से आपके समक्छ व्यक्त करना चाहता हूँ की :-

देखो कैसा समय है आया, आतंकी ने भी एप्रोच लगाया,
और उमर {उमर अब्दुल्ला} ने चेहरा असली दिखलाया..

करता है गुहार वह, माफ़ करो अजमल अफज़ल को,
गुहार पर धित्कार है, लगता है चल रहा लाशों का व्यापार है..

कैसे माफ़ करें हम मासूमों के हत्यारों को,
छिना है जिसने हमसे हमारे प्यारों को..

भूल गए क्या संसद पर हमला, हमलों से मुंबई जब दहला,
कश्मीर निशाने पर रहता सदा है क्या यह भी भूल गए अब्दुल्ला..

फांसी पर चढाओ पहले जो इनका समर्थक है,
कहता है जो फांसी देना आतंकी को निरर्थक है..........!!
अगर आप मेरी भावनाओं से सहमत हैं तो कृपया अपनी प्रतिक्रिया अवश्य देवें!!

Monday, June 28, 2010

क्या आर्थिक सम्पन्नता ही राजनीती का मापदंड है ?


वन्दे मातरम !!
मै आपका अपना गौरव शर्मा "भारतीय" वर्तमान राजनैतिक परिवेश में युवाओं की उपयोगिता के साथ ही राजनीती में उनकी सार्थकता के सम्बन्ध में अपने विचारों को आप तक पहुँचाने के के लिए उपस्थित हूँ !!
आज राजनीती का अर्थ बदलता जा रहा है तथा आज की राजनीती केवल पैसों की राजनीती बनती जा रही है तथा केवल धनोपार्जन ही उद्देश्य बनता जा रहा है या कहा जा सकता है की किंचित वर्ग विशेष के द्वारा सुनियोजित रणनीति के तहत राजनीती को महंगा एवं आर्थिक रूप से सम्पन्न जनों के लिए सुलभ बनाया जा रहा है !!
मै बात कर रहा हूँ युवाओं के सम्बन्ध में विशेषकर गरीब और मध्यमवर्गीय परिवार के युवा के सम्बन्ध में, वे अगर राजनीती में सक्रिय है तो उसे अनेक परेशानियों का सामना करना पड़ता है उन्हें तब तक महत्व नहीं दिया जाता जब तक उसे किसी बड़े राजनेता का "आशीर्वाद" प्राप्त न हो या फिर वह "सम्पन्न" न हो !!
मै स्वयं राजनैतिक कार्यकर्ता होते हुए यह प्रश्न देश के तमाम राजनैतिक दलों से पूछना चाहता हूँ की क्या किसी युवा के कुशल राजनैतिक छमताओं का कोई मोल नहीं ?? क्या सम्पन्नता ही राजनीती का मापदंड है ?? वर्तमान में संगठन के स्तर पर भी चुनाव कराये जा रहे हैं , स्वागतयोग्य है यह निर्णय , मगर चुनावी प्रक्रिया में अगर गौर करें तो हमें पता चलता है की यहाँ भी "सम्पन्नता" का ही बोलबाला है और सामान्य कार्यकर्ता उपेक्छित है !! प्रश्न यह है की इस प्रकार से जब धनि वर्ग को महत्व दिया जाना है तो क्यों मध्यमवर्गीय तथा गरीब परिवार के कार्यकर्ताओं का शोषण किया जाता है ?? मेरा किसी सम्पन्न व्यक्ति या वर्ग के प्रति किसी भी प्रकार का कोई विरोध नहीं है मगर मै उस कार्यकर्ता की व्यथा को आपके सामने रखना चाहता हूँ जो वर्षों से निस्वार्थ भाव से समर्पित होकर कार्य करता है मगर जब अवसर आता है संगठन में प्रतिनिधित्व देने का तो कहीं न कहीं नेतृत्व छमता , समर्पण पर आर्थिक सम्पन्नता भरी पड़ती है , सक्रिय कार्यकर्ता देखते रह जाता है और ऐसा व्यक्ति जिसका संगठन में कोई योगदान नहीं है वह बाजी मार जाता है , जरा सोचिये क्या गुजरता होगा उस व्यक्ति पर ?? यह किसी एक दल की नहीं कमोबेश आज की राजनैतिक परिवेश में यह पीड़ा प्रत्येक दल से सम्बंधित उन नेताओं एवं कार्यकर्ताओं को है जो निम्न अथवा मध्यमवर्गीय परिवार से ताल्लुख रखते हैं !!
मै यहाँ केवल राजनितिक दलों पर इस दोष को मढ़कर इस बहस को समाप्त नहीं कर सकता यह कहना अतिशयोक्ति नहीं होगी की देश में संचालित निर्वाचन प्रक्रिया की भी कमोबेश यही स्थिति है , दिन प्रति दिन निर्वाचन प्रक्रिया महँगी होती जा रही है और राजनीती आम आदमी से कोशों दूर होती जा रही है कोई सामान्य व्यक्ति चुनाव लड़ने की बात सोच तक नहीं सकता !! और कहीं वह भूलवश ऐसा कर बैठा तो रही सही कसर जनता {जनता से आशय यहाँ कुछ विशेष अल्प सिक्छित वर्ग से है} पूरी कर देती है तात्कालिक लाभ और लालच में आकर वोट देती है जिससे निश्चित ही गलत चुनाव होता है और भ्रस्टाचार में वृद्धि होती है कहना बेवजह न होगा की जो प्रत्याद्शी चुनाव में लाखों करोड़ों रूपये खर्च कर जीतेगा वह उससे कहीं अधिक धन अर्जित करना चाहेगा तो ऐसी स्थिति में अगर नुकसान किसी का होता भी है तो जनता का ही है !!
मै इस विस्तृत लेख और आप सभी के माध्यम से देश के समस्त राजनैतिक दलों और से निवेदन करना चाहता हूँ की वे समर्पित और योग्य कार्यकर्ताओं का सम्मान कर देश को कुशल नेतृत्व प्रदान करें और निर्वाचन आयोग से भी मै अपील करता हूँ की महँगी होती निर्वाचन प्रक्रिया पर अंकुश लगाकर लोकतंत्र का सम्मान करें ...............वन्दे मातरम !!

Sunday, June 20, 2010

पिताजी.........

क्या लिखूं पिता पर कुछ भी समझ न पाता हूँ, कहना तो चाहता हूँ पर मौन ही रह जाता हूँ!!क्या कह सकता हूँ मै पिता पर कुछ, वो तो मेरी ख़ामोशी भी जान जाते हैं, मेरी हंसी पर हँसते हैं, मेरे ग़मों में रोते हैं और मेरी आँशु बारिश में भी पहचान जाते हैं, उनके आशीर्वाद से मेरे बिगड़े काम भी बन जाते हैं!! मेरी हर जिद पूरी करते हैं, वो कभी न मुझसे कुछ कहते हैं, खुद तो दुखी होते हैं पर मुझको सदा हंसाते हैं और मुझे हँसता देखकर खुद भी मुस्काते हैं, जीवन के हर मोड़ पर वो मेरा साथ निभाते हैं, पिता नहीं विधाता हैं वह, जो हर पल पूजे जाते हैं !! हे इश्वेर प्रार्थना है मेरी, दुनिया के हर माता पिता को चिरायु, दीर्घायु और शतायु बनायें और सभी संतानों को इतना काबिल बनायें की वे अपने माता पिता की सेवा कर सकें.........!!

Friday, June 18, 2010

और मै फिर आ गया आपके पास ..............

वन्दे मातरम ........कैसे हैं आप सब ?
मै आपका अपना गौरव शर्मा "भारतीय" आज अपने को आप सभी के बीच पुनः पाकर प्रसन्न हूँ !!
कहते हैं की जब कोई भी कार्य कुशलता के साथ संचालित हो रहा हो तो उसमे बाधा जरुर आती है और यही बाधा उसके सफलता की निशानी भी होती है, ऐसा ही कुछ हुआ मेरे साथ, विगत दिनों कुछ असामाजिक तत्वों द्वारा दुर्भावना वश तब मेरे प्रोफाइल सहित ब्लॉग को अधिग्रहित कर समाप्त कर दिया कर गया जब उसे आप सभी का अपार स्नेह और आशीर्वाद मिल रहा था
मै उदास हुआ परेशान हुआ इन तीन दिनों में मैंने जितनी परेशानी महसूस की मुझे नहीं लगता की कभी और की हो और इन्ही दिनों में मुझे अहसास हुआ की आप सभी के शुभकामनाओं, स्नेह और आशीर्वाद के बिना मै कुछ भी नहीं, मुझे स्वीकारने में कण मात्र भी संकोच नहीं की आप लोगों के बिना मेरा कोई अस्तित्व ही नहीं, मेरे समस्त आदरणीय जन, मेरे मित्र गण और मेरे शुभचिंतकों से परिपूर्ण समृद्ध परिवार ही मेरा सब कुछ है !! मेरे इसी परिवार के सदस्यों ने इस कठिन पल में मेरा साथ दिया, हौसला बढाया और फिर से आपसभी के बीच में आने के लिए तैयार किया !!
आज मै पुनः मेरे नए प्रोफाइल और नए ब्लॉग के साथ आपके बीच उपस्थित हूँ सच में मुझे ऐसा लग रहा है की मुझे फिर से जीवन मिल गया है, और मै आज धन्यवाद देना चाहता हूँ उन सभी शुभचिंतकों का जिन्होंने मुझे नए जोश से भर दिया और फिर से अपना स्नेह और आशीर्वाद प्रदान करना प्रारंभ किया, सच में उन सभी के कारण ही तो मै फिर से आ सका आपके पास ...........